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Monday, April 10, 2023

सोढा राजपूत एवम नैंसी मुणोत

 

सोढ़ा एक राजपूत वंश है जो सिन्ध के थारपरकर जिले में तथा गुजरात के कच्छ जिलों की मूल निवासी रही है। वर्तमान समय में पाकिस्तान में २५ हजार से ३० हजार परिवार हैं। प्रतिवर्ष वहाँ से सात-आठ सौ परिवार भारत आते है वे एकमात्र पाकिस्तान में राजपूत जाति हैं। भारत सरकार भी उनके आव्रजन के लिए विशेष व्यवस्था करती है और उन्हें एक माह से लेकर छः माह तक भारत में रहने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

रतेकोट और अमरकोट रियासते सोढा राजपूतो (परमार) ने यहाँ शासन किया ये अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हैं। अमरकोट से पूर्व सोढा (परमार) राजपूत रतेकोट दुर्ग में रहते थे । इनका सीधा संबंध परमार साम्राज्य से है ।



सोढा राजपूत चक्रवर्ती महाराजा वीर विक्रमादित्य उज्जैन के वंशज हैं। जिन्होंने शको पर विजय के बाद विक्रम संवत की स्थापना की चक्रवर्ती महाराजा वीर विक्रमादित्य की 25 वीं पीढ़ी बाद छत्रपति महाराज वीर मालवा राजा भोज हुए

 

परमार वंश के छत्रपति महाराजा जगदेव परमार महाराजा उजंयादीप के पुत्र थे उनका राज्य उज्जैन और धारा नगर पर था । शक्ति वांकल माता महाराजा जगदेव परमार की पुत्री थी। महाराज जगदेव परमार की आठवीं पीढ़ी बाद छत्रपति महाराज बाहड़देव परमार हुए विक्रम संवत 1183 में जूना केराड़ू(राजस्थान का खजुराहो बाड़मेर)पर शासन किया । विक्रम संवत 1196 में बहाड़राव परमार ने अपने राज्य का नाम बाड़मेर कर दिया जो वर्तमान में राजस्थान में हैं। महाराजा की बीमारी के कारण मृत्यु हुई इसके बाद इनका शासन उनके पुत्र महाराजा छत्रपति चाहड़राव ने बाड़मेर से 50 कोस दूर शिवपुरी नामक स्थान की स्थापना की जिसे वर्तमान में शिव (बाड़मेर शिव विधानसभा क्षेत्र) के नाम से जाना जाता हैं। महाराजा के दो पुत्र और एक पुत्री थे । सबसे बड़ी पुत्री कल्याण कँवर जिन्हें शक्ति सच्चियाय माता के नाम से भी जाना जाता हैं(ओसियां, केराड़ू )। बड़े पुत्र सांखला राजपूत जिन्होंने पिता का राज्य जाँगूलदेश लिया और छोटे पुत्र सोढा हुए । सोढा ने विक्रम संवत 1282में सिंध के अधिकतर हिस्सों को युद्ध कर के जीत लिया और रतेकोट(कैलाश कोट) के मुगल शासक रता बादशाह को बाबा वीरनाथ जी कृपा से हराया और वो मुगल रत्ता मारा गया। इसके बाद थारपारकर और अमरकोट के किलो पर अधिकार किया। राणा सोढा के बड़े पुत्र कुँवर चाचकदेव सोढा हुए और छोटे *कुँवर दूदा जी कुँवर दूदा जी के पुत्र राणा महेंद्र सिंह सोढा हुए जिनके प्रेम प्रसंग के किस्से मूमल-महेंद्र के नाम से आ भी थार में जाने जाते है।

 

मूमल राठौड़ राजानन्द राठौड़ की पुत्री थी जिनका राज्य रोड़ी सीकर था । मूमल के महलों के अवशेष जैसलमेर के लोद्रवा गांव में देखे जा सकते हैं

राणा अत्यन्त दानी पुरुष थे इसलिएयोग उन्हें राणा पुकारते थे । विक्रम संवत 1296 में राणा महेंद्र की पुत्री कायलादेकँवर का विवाह धांधल जीके पुत्र *पाबूजी राठौड़ से हुआ था

 

पाबूजी राठौड़ को शादी के दौरान पता चलता है कि हमारे राज्य की गाय चोरी हो गयी है इसलिए मंडप से 7 फेरे न लेते हुए गठजोड़े को तलवार से काटकर युद्ध मे गए और गो रक्षा में अपने प्राण त्याग दिए।

कायलादे कंवर पाबूजी के पीछे सती हुई थी। राणा चाचकदेव के पुत्र राणा रायदेव विक्रम संवत 1303 अमरकोट और रतेकोट के गद्दी पर बैठे। अपने राज्य की गायों चोरी होने पर राणा ने केसी के हैदर खान के साथ जैसलमेर की किशनगढ़ सीमा पर युद्ध किया और जिसमे हैदर खान मारा गया और आते समय जैसलमेर महारावल ने उनका स्वागत किया और राणा ने अपनी पुत्री मैनावती का विवाह महारावल पुनपाल से करवा दिया । राणा के पुत्र राणा जेभृमसिंह हुए और जेभृम सिंह के पुत्र राणा जसहड़ हुए राणा जसहड़ के पुत्र राणा सोमेश्वर हुए राणा सोमेश्वर के चार पुत्र थे 1 राणा दुर्जनसाल 2राणा आशराव (राणा आसराव जिन्होंने नगर विरवाव जीतकर राज किया । 3भीम सिंह इनके दो पुत्र हुए अखा जी और नादा जी ,इन्होंने गुड़ा और नगर (बाड़मेर राजस्थान)के 48 गांव बसाए । 4तेजपाल इनमे 13 पुत्र थे इनकी जागीरी कछ गुजरात मे हैं। राणा दुर्जनसाल विक्रम संवत 1404 में अमरकोट व रतेकोट का राणा बना । राणा ने ही अमरकोट (पाकिस्तान)के पास *लाम्बा नाम का तालाब खुदवाया था राणा दुर्जनसाल का पुत्र *राणा खिंवरा विक्रम संवत 1439 में अमरकोट का राणा बना उस समय जैसलमेर राज्य के *महारावल दूदा जी थे महारावल के भाई रावल तिलोकसि वीरता के कारण प्रसिद्धि हुए। उस समय जैसलमेर पर आक्रमण हुआ और महारावल ने अमरकोट राणा खिंवरा को सहायता के लिए बुलाया उस युद्ध मे खिंवरा की सेना मुस्लिम सेना पर भारी पड़ी और राणा और महारावल दूदा जी विजय हुई । राणा की बहादुरी से प्रश्न होकर महारावल दूदा ने अपनी पुत्री का विवाह राणा खिंवरा के साथ करवा दिया । विवाह का तोरण जैसमलेर किले की सूरज प्रोल पर लटकाया गया था तोरण की रश्म पूरी करने के लिए राणा ने घोड़ी को प्रोल तक उठाया था घोड़ी के पैरो के निशान आज भी जैसलमेर के किले की सूरजपोल पर अंकित है । राणा ने 1550 घोड़े लाग के रूप में जैसलमेर में ही दान किये ,उनकी दान वीरता के किस्से मारवाड़ में राणा खींवरा के दोहों औए लोकगीतों में मिलते है। राणा के पड़पोत्र राणा हमीर सिंह हुए जिनका राज तिलक विक्रम संवत 1542 में अमरकोट में हुआ ।

 

राणा हमीर सिंह ने ही दिल्ली के *बादशाह हुमायूँ को शरण दी थी और *अकबर का जन्म अमरकोट के किले में हुआ और बादशाह के आक पिलाने पर भी अकबर नहीं मरा तब सगुनी स्वररूप सिंह सोलंकी के कहने पर हुमायूं ने अकबर को नही मारा। बाद में अकबर ने राणा के कर्ज को एक चिन्ह हमीराणा दाग देकर उतारा उस चुन्ह के पशुओं पर और राज्य में जजिया कर नही लिया जाता था। उस हमीराणा दाग से दागे गए पशु मुगल राज्य में नीलाम नही होते थे।

राणा हमीर में पुत्र राणा बीसा हुए जिन्होंने मारवाड़ पाली पर दो साल शासन किया बाद में अपने छोटे भाई से युद्ध कर अपना अमरकोट राज्य वापिस लिया। राणा बीसा ने ही सन 1633 में ही महाराणा प्रताप को अपना मुहता *भामाशाह मदद के लिए दिया था।

 

इस घटना को एक कवि ने कविता का रूप दिया था

पाततन छोड़ चितोड़, दिश पछिम। भेलो चढ़िया शिशोदिया भूप ।। बढ़ हथ राणा भेट्यो बीसों रजवट कोट अमरपुर रूप । सोढो कहे सुठा आप सिसोदा।। आप चढ़िया किन दिश आज । बड़ा वचन कहो इम राणे वीसे ।

 

 मत छोड़ो आप मेवाड़ ।।

शंकर एकलिंग आप साथे अकबर जासे भाग उजाड़ ।। कहे प्रताप वीसा सुन पारस। ए कोई करो बड़ो अहसान उमर तुज भुला नही ओपर रहसि बात घणा दिन राण।। भारमल सा सुत तेडयों भोमो।। मुहतो राण तणो मन मोट।। वीस सहस धन दीनो वीसे। कीनो नाम उदेपुर कोट।। खिमहर सोढ पृथ्वी जस खाटे पाताल लियो उदेपुर पाड़।।

 

राणा के पुत्र राणा तेजसी जी हुए उनके दो पुत्र हुए बड़े1राणा कान्हा जी छोटे 2 राणा चाम्पा जी जोधपुर दीवान

 

मुहणोत नेणसी के तव्हारिक जोधपुर के पृष्ठ सँख्या 229 से 260 तक मे राणा कान्हा और राणा चाम्पा जी के बारे ने पता चलता है

कान्हा रतेकोट ,चाँम्पा अमराने सोहे मौज करे मन मोट, इन् विध गढ़ा उपरां

 

विक्रम संवत 1681 में राणा कान्हा जी रतेकोट के राणा बने और अमर कोट का शासन अपने भाई को राणा कान्हा जी ने राणा चांपाजी सोढा को दे दिया।

 

राणा कान्हा जी रतेकोट

 

रतेकोट के आखिरी राणा नारायण सिंह सोढा हुए। राणा नारायण सिंह के पिता का नाम राणा गोविंद सिंह सोढा था जिनके तीन पुत्र थे बड़े पुत्र विजेराव सोढा हुए दूसरे पुत्र नारायण सिंह सोढा ,विक्रम संवत 1719 में नारायण सिंह को बड़े भाई विजेराव द्वारा रते कोट का शासन दे ल दिया गया उनका राजतिलक मथुनागढ़(पाकिस्तान) में हुआ । राणा नारायण सिंह ने अपने तीसरे भाई दूदा सोढा जी को अपनी सेना का सेनापति नियुक्त किया। विक्रम सवंत 1740 में वेजेराव सोढा ने रतेकोट दुर्ग से राणा नारायण सिंह की सेना लेकर पास के ही एक किले लीलमाकोट पर कब्जा कर दिया । राणा नारायण सिंह सोढा के तीन पुत्र हुए बड़े कुँवर राम सिंह दूसरे कुँवर बेरसीदास सिंह और सबसे छोटे राणा गंगदास सिंह जी। विक्रम संवत 1724 में जब यहां अकाल पड़े तो राणा ने सात वर्ष तक राज्य धन से सबका पोषण किया । दोहे : राणे नारण रखिया ,रेणू खट पचास। अकाल सात कढाव्या ,कविया पूरी आस।।

 

सत्रह सो चौबीस में ,दगयो सारो देश। रेणू सरँग रखियो ,नारण राणा नरेश ।। विक्रम संवत 1746 राणा नारायण सिंह की मृत्यु हुई,इसके बाद कुँवर राम सिंह ,कुँवर बेरसीदास ,और कुँवर गंगदास सिंह में से सबने राज्य बांट कर लिया । इन्होंने तीनो ने राज्य का त्याग कर दिया ,इस कारण राज्य राणा नारायण सिंह के पुत्र कुँवर गंगदास सिंह के वंशज गंगदास सोढा राजपूत कहलाते हैं गंगदास सिंह ने कुशलकोट के युद्ध मे विजय प्राप्त कर छोल(पाकिस्तान) बसाया इनकी जागीरी 12 गांवो में हैं जो आधे सिंध अमरकोट रतेकोट के आसपास अखेराज सिंह का गांव और छोल में रहते है और आधे राजस्थान भारत के बाड़मेर जैसलमेर के पास सुंदरा (विश्व का क्षेत्रफल की दृष्टि का सबसे बड़ा गांव) खुहड़ी, ख़बड़ाला, बचिया, रोहिडी आदि गांव

 

राम सिंह सोढा के वंशजों के ठिकाने करड़ा, पोछिना, गूँजनगढ़ ,केशर सिंह का गांव, मिथड़ाऊ आदि ये सोढा अछे जगिरीदार हैं जैसलमेर रियासत के समय इन्हें रियासत जैसलमेर से लाठी से मारने का विशेष अधिकार था इनके द्वार मारे गए व्यक्ति की पैरवी अंग्रेजी सरकार भी नही करती थी। बैरसीदास सिंह के वंशजों के वंशज बैरसी सोढा कहलाते हैं इन सोढा के ठिकानों में बेरसियाला,,(राब्लाऊ, रणाऊ पाकिस्तान) आदि हैं । राणा नारायण सिंह के वंशज सारे नारणोत कहलाते हैं ये लोग अछे जगिरीदार हैं।

 

राणा चाँम्पा जी अमरकोट

 

राणा चाँम्पा जी के दो पुत्र थे 1 राणा गंगा 2 राणा हापा राणा गंगा के पांच पुत्र थे 1 राणा प्रताप सिंह 2 मानसिह सोढा 3 सुरताण सोढा 4 भोपत सोढा 5 सोढा सूरजमल राणा प्रताप सिंह के पुत्र राणा चन्द्र सेन थे और उनके पुत्र भोजराज सोढा को राज्य ने राणा नही बनाया । इसके बाद अमरकोट रियासत के राणा ,राणा गंगा जी के पुत्र सुरताण सोढा को बनाया। वर्तमान में सुरताण सोढा के वंशजों में 26 पीढ़ी के राणा हमीर सिंह हैं । राणा अर्जुन सिंह राणा अर्जुन सिंह ने राजपुतनाने में न जाकर विभाजन के समय पाकिस्तान में जाने का निर्णय लिया था वे अली जिना के अछे मित्र थे । राणा अर्जुन सिंह के पुत्र राणा चन्द्र सिंह कट्टर राजनेता थे वे पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के संस्थापक सदस्ययो में से एक थे वे पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो के समय नारकोटिक्स डिपार्टमेंट में मंत्री भी रहे वे कई बार जन प्रतिनिधि चुने गए । राणा चन्द्र सिंह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी.सिंह के करीबी रिश्तेदार थे । राणा के पुत्र राणा हमीर सिंह वर्तमान पाकिस्तान सरकार के जनप्रतिनिधि हैं जिनके पुत्र कुंवर करणी सिंह का विवाह 2014 में जयपुर के कानोता ठिकाने में मान सिंह की पुत्री पद्मन्नी कँवर। से हुआ। कुंवर राजनीति में उतर चुके हैं। भोजराज सोढा के वंशजों में सारे अच्छे जगिरीदार है इनके ठिकाने छाछरो ,बावड़ी आदि हैं लक्ष्मण सिंह जी छाछरो पाकिस्तान में रेलमंत्री रह चुके है।

 

विजेरॉव सोढा राजपूत विजेराज जी (राणा गोविंद सिंह के पुत्र इन्ही के वंशज ठाकुर रतन सिंह ने 1660 में तामलोर गांव बसाया। ठाकुर नदा जी ने 1707 में डाहली बसाया। ठाकुर कलौजी भागचन्द जी ने 1709 देदुरसर और जैसिन्धर बसाया। ठाकुर राम सिंह ने विक्रम संवत 1808 में गडरा गांव बसाया।

 

अन्य सोढा परमार राजपूत केलण ,अखा ,गेलड़ा, भुजबल, आसकरण, मालदेव, सूरजमल(करड़ा गांव ) नन्दा, दूदा, रत्ता, निदा ,लूणा, ब्रजघ,भूपत मढ़ा, संग्रासी , वीरमदे ।

खारिया सोढा में विराजमान वीरमदे सोढा राजपूतो का इतिहास , उत्पत्ति इत्यादि की जानकारी के लिए हमे नेन्सी मुणोत की पुस्तक - नैंसी मुणोत की ख्यात एवम नैंसी मुणोत रा परगना , का अध्ययन करना होगा । खारिया सोढा के बारे में सक्षिप्त परन्तु सत्यपित एवम सबसे पुराना इतिहास इसी पुस्तक में उपलब्ध है ।

इस पुस्तक का संदर्भ एवम पृष्ठों की जानकारी मेरी दूसरी पोस्ट में दी गयी है जिसका लिंक पर क्लिक करके आप पढ़ सकते है ।

 

http://khariyasodha.blogspot.com/2021/10/2021.html


Refrence- 

Nancy Muhnot`s Book ( Jodhpur Granthalay- Rajasthan)

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Tuesday, October 19, 2021

सोढा और धरणीवराह - Sodha & Dharnivraah

 धरणीवराह के वंशज सोढा और सांखला 2 भाई थे । सोढा के वंशज सोढा परमार और सांखला के वंशज सांखला परमार कहलाये । अब हमें यह जानना है कि सोढा और सांखला का पूर्वज धरणीवराह कौन थे , यह प्रश्न विवादस्पद है । 

परमार / पंवार वंश में तीन धरणीवराह हुए है । एक धरणी वराह किराडू के शासक थे । जिनका समय 7वीं शताब्दी के आसपास था । दूसरा धरणी वराह विकर्मी संवत 1050 के लगभग था । तीसरा धरनिवराह , जगदेव परमार का प्रपौत्र था, जिसका समय लग्भग 1254 विक्रमी संवत का था । अब इन तीनो धरनिवराह में सोढा सांखला के पूर्वज कौन थे । 
इसका जवाब हमे नैणसी मुणोत की ख्यात से मिलता है। नैणसी की ख्यात के अनुसार -
" सोढा सांखला पंवार मिले, 
पेहली इन्नोरो दादो धरनिवराह बाहड में जूनो किराडू कहीजै , तिन्नरो धनी हुतो ।
तिन्नरो नवे कोट मारवाड़ रा हुता ।।

नैणसी के इस कथन से संकेत मिलता है कि-
 सोढा और सांखला का पूर्वज धरनिवराह किराडू का शासक था, जिसके अधिकार में नों कोट थे । नों कोट का धनी धरनिवराह सांतवी शताब्दी के लग्भग था । अतः कहा जा सकता है कि धरनिवराह के वंशज बाहड और बाहड के वंशज सोढा और सांखला हुए ।

सोढा परमार की खांप का अध्ययन करते है तो ज्ञात हो है कि - 
अमरकोट के शासक खींवर के पांच पुत्र हुए -
अवतारदे
चीतों
गूजर
वीरधवल
वीरमदे

चीतों और गूजर के वंशज जैसलमेर चले गए । जैसलमेर के सोढा इन्ही सोढा के है । 
वीरमदे के वंशज जोधपुर अम्बर मारवाड़ क्षेत्र में है । खारियासोढा में वीरमदे के वंशज है ।
 इसी ब्लॉग में वीरमदे की पूरी वंशावली अग्निकुंड से लेकर 2021 तक कि उपलब्ध करवाई गई है ।

अमरकोट के शासक दुर्जनशाल के छोटे भाई आस्रराव ने पारकर क्षेत्र पर अधिकार किया । इसी आसराव के वंशज आसराव सोढा कहलाये  । पारकर पर अधिकार करने के कारण पारकर सोढा भी कहलाते है । ये बिहार के नागपुर क्षेत्र के आस पास भी है ।


अमरकोट के शासक- 
दुर्जनसाल
खींवरा
अवतारदे
धीरा
हम्मीर
वीसा
तेजसी
कूपा
चापा
गंगा
सूरजमल
करण .... .................
 विस्तृत जानकारी अन्य लेख में उपलब्ध करवाएंगे । 
इस लेख का उद्देश्य धरनिवराह और सोढा वंश का संबंध पता करना है ।


Sunday, October 17, 2021

कीरत सिंह सोढ़ा - मेहरानगढ़ ( जोधपुर दुर्ग )

 कीरत सिंह सोढ़ा

जोधपुर दुर्ग पर राव जोधा के पुत्र राव बिका ( बीकानेर रियासत के संस्थापक) ने अपने पिता की मृत्यु के उपरांत राव सूजा के शासन काल मे राज्य चिन्ह लेने हेतु आक्रमण किया था । परन्तु राजमाता जसमादे ने दोनों भाईयों में समझौता कर युद्ध की संभावना को समाप्त कर दिया ।

इस दुर्ग के साथ वीर शिरोमणि दुर्गादास, कीरत सिंह सोढा, और दो अतुल पराक्रमी योद्धायों धन्ना और भींवा के पराक्रम बलिदान स्वामी भक्ति और त्याग की गौरव गाथा जुड़ी हुई है । लोहापोल कि पास जोधपुर के अतुल पराक्रमी वीर योद्धायों धन्ना और भींवा की 10 खंभों की स्मारक छतरी ( महाराज अजीत सिंह जी द्वारा निर्मित करवाई गई )  है . और वीर किरत सिंह सोढा की छतरी इसके पूर्वी प्रवेश द्वार  जयपॉल की बाई और विधमान है ।

कीरत सिंह सोढ़ा ने शत्रुयों द्वारा मेहरानगढ़ किले को घेर लिए जाने पर असाधारण वीरता का परिचय दिया था एवम अपने प्राण न्योछावर किये थे ।

कीरत सिंह की अनुपम वीरता और कर्तव्यनिष्ठा पर रीझकर गुणग्राही महाराजा मानसिंह ने उनकी प्रशंसा में यह दोहा कहा जो उनके स्मारक पर अंकित है - 

"तन झड़ खांगां तीख, पाड़ी घणा खल पोढियो, 

'किरतो' नग कोडिक जड़ियो गढ़ जोधान" II







सोढ़ा राजपूतों की कुल देवी - माँ हरसिद्धि और माँ सच्चियाय

 इतिहासकार नेत सिंह सोढा का जन्म ज़ुरा केप (भुज कच्छ ) में हुआ । वर्तमान में मुंबई के निवासी है । इन्होंने बाड़मेर जैसलमेर जोधपुर के पुस्तकालयों का विस्तृत अध्ययन किया और कई वंशो की वंशावलियों की प्रामाणिकता के ऊपर शोध किया  । इस शोध के आधार पर इन्होंने अपना अनुभव और ज्ञान कथाकार के रूप में सोशल मीडिया के ऊपर कई जगह शेयर किया है । 

इन्होंने परमार , सोढा , हरसिद्धि माता , सचिय्याय माता , पीर पिथोरा जी के संबंध में बहुत ही गहन अध्ययन करके प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध करवाए है । इस इतिहासकार की वजह से अग्निकुंड से लेकर वर्तमान तक का सोढा वंशावली को सहेजा गया है । इन्होंने अपनी कथायो के माध्यम से यह बताया है कि हरसिद्धि माता ही सच्चियाय माता के जन्म में पुनः अवतरित हुई थी । 

कथाकार ने पीर पिथोरा जी की कथा बताते समय स्पष्ठ उल्लेख किया है कि राजा वीर विक्रमादित्य ने अपना शीश 11 बार माता हरसिद्धि को भेंट किया था और वो वापस जीवित हुए थे । परन्तु 12वी बार शीश भेंट करने के बाद पुनः जीवित नही हुए थे । 

वीर विक्रमादित्य के इस शीश दान से माता हरसिद्धि बहुत प्रसन्न हुई थी और उन्होंने राजा से वर मांगने के लिए कहा । तब राजा ने विनती कि - हे माता आप मेरे वंश में जन्म लो ।

इस वचन को पूरा करने के लिए हरसिद्धि माता ने चहडराव जी के यहां जन्म लिया जिनका बचपन का नाम केसर कंवर / कल्याण कंवर था जो आगे चलकर सच्चियाय माता ओसियां माता के नाम से विख्यात हुई । यही कारण है कि सोढ़ा वंश की कुलदेवी के रूप में आज भी हरसिद्धि माता और सच्चियाय माता दोनो को पूजा जाता है ।





वीरमदे सोढा की वंशावली - अग्निकुंड से आज (2021) तक - खारिया सोढ़ा- (VIRAMDE SODHA)

 अग्निकुंड

परमार
पोहोकर
परवार / पुरुवार
परासन जी
सेनजी/ सजाकरन जी
भरत जी / 
भारसेन
कलग
किलइन्द्र
भरी हर्षराज
चतरंगदेव जी/ राजा चतरंग
गंधर्वसेन/गर्दबिल्ल/ महेन्द्रादित्य
विक्रमादित्य - (भाई भर्तहरि ऋषि)
भीमसुख जी
राजबलदे
पगसेन/ पतसेन
भूपतसेन / राजा भूपत
जेतमल जी / जसधमल
शाक्तचन जी
वीरचन जी/ राजा वीरोंचंद
महिपाल
पृथ्वीरण
गोपिंड / गऊपड़
गोड़ीव/ गयुदेव
सेन
कालसेन / कारधेन
सेंशनराज
वीरपाल
विजयराज
राजासोम
सिंधलसेन( सिंधु प्रदेश बसाया)
राजा भोज ( भोपाल बसाया)
राजाबंध
उदेक जी/ उदयादित्य
जगदेव परमार/ जगदेवराय ( शीशदान किया कंकाली देवी को )
डाबरंग जी/ दाम्ब्र जी
धांधूमल  / धधमार / सिंधुराज
धरनिवराह
धोम जी
उपट राव / उपलराव जी ( ओसियाँ बसाया)
अलपराव
बाहडराय जी
चाहड़राव जी / छोड़ जी
सोढा - सांखला - केसर कंवर
सोढा के 2 पुत्र हुवे- 
चाचगदे/ चामकदे एवम सिंधल
चाचगदे के पुत्र राजदे
जयब्रह 
सोमेश्वर
धारावर्ष/ धराहवर जी
इनके दो पुत्र हुए - 
दुर्जनसाल एवम आसराव
दुर्जनसाल के खींवराज
खींवराज के राणा अवतारदे
राणा अवतारदे के 5 पुत्र हुए- 
राणा थीरा, कीता, गज्जू, वीरधवल, एवम पांचवा पुत्र वीरमदे
वीरमदे के भी 5 पुत्र हुए- 
तमायची, रतनसी, मालदेव, उगमसिं,एवम पांचवा सत्ता
तमायची का पुत्र देवराज
देवराज का साधा
साधा का बन्ना
बन्ना का सहसमल
सहसमल का अदिकमल (अड़वाल) 
अड़वाल (अडीकमल ) के एक पुत्र महेराज (महेश) एवम पुत्री बदन देवी हुई । कुंवरी बदनदेवी को जोधपुर रावजी श्री मालदेव जी को परणाई । 

महेराज / महेश का वंश
महेराज का नोटशी
नोटशी के पुत्र ईशरदास एवम नाहरदास
ईशरदास का पुत्र गोरधन
गोरधन के 3 पुत्र खींवराज , गिरधरदास एवम रूगनाथ सिंह हुए । 

इन तीनो पुत्रो के परिवार , वंश आज खारिया सोढ़ा गांव में बसते है । यह गांव राजस्थान के जोधपुर मंडल के सोजत परगना में मारवाड़ जंक्शन के पास स्तिथ है । इस गांव में आज 100 से ज्यादा सोढ़ा राजपूतो के परिवार है । इसी गांव के ओरण में श्री लवा जी महाराज का मंदिर भी है । बताया जाता है कि यह लवा जी महाराज भाटी राजपूत थे जिन्होंने गायों की रक्षा हेतु युद्ध मे अपने प्राण त्यागे थे । नैणसी मुणोत की ख्यात और नैणसी मुणोत की परगना से अध्ययन करने पर इस गांव का इतिहास 800 साल पुराना लगता है ।

रूगनाथ सिंह जी के वंशवृक्ष- 
रूगनाथ सिंह जी के देवकर्ण
देवकर्ण के जगराम सिंह
जगराम सिंह के खींव सिंह
खींवसिंह के झुंझार सिंह
झुंझार सिंह के बरखत सिंह
बरखत सिंह के बहादुर सिंह
केसर सिंह जी
कुंदन सिंह जी एवम सोन सिंह जी
(1) सोन सिंह जी अविवाहित थे तभी उनका देहांत हो गया था ।

(2)  केसर सिंह जी का जन्म , जोर सिंह जी के यहां हुआ था । केसर सिंह जी बहादुर सिंह जी के गोद आये थे । केसर सिंह जी के पुत्र कुंदन सिंह एवम सोन सिंह जी हुए । जोर सिंह जी का जन्म खींवसिंह जी के तीसरे पुत्र झालंम सिंह के परिवार में हुआ था ) 

कुंदन सिंह जी के 2 पुत्र हुए- 
भंवर सिंह एवम रामसिंह 

कुंदन सिंह जी के एक पुत्री हुई भँवर बाईसा , जिनका विवाह सोजत सिटी के पास धंधेड़ी गांव में सवाई सिंह जी के साथ हुआ। भंवर बाईसा के 3 पुत्र हुए भगवान सिंह ( भंवर सिंह ) , कैलाश सिंह एवम इंद्र सिंह । भंवर बाईसा के एक कुंवरी हुई एजु कंवर जो जोधपुर के उजलिया गांव में परणाई ।
कुंदन सिंह जी ने दो विवाह किए थे गुड़ा केसर सिंह एवम मामावास् । मामावास् में लालसिंह जी मामोसा की पुत्री अंतर बाईसा (भुआ सा) है जिनका विवाह जेलवा गांव में भंवर सिंह जी भाटी के यहां हुआ । भंवर सिंह जी भाटी के पुत्र अजीत सिंह भाटी है 

भंवर सिंह जी सोढा के 4 पुत्र एवम 2 पुत्रियां हुई हुए- छैल सिंह , डूंगर सिंह, मालम सिंह, मान सिंह , निहाल कंवर , सूरज कंवर . भंवर सिंह जी ने 2 विवाह किए थे .

राम सिंह जी सोढा के 3 पुत्र एवम 1 पुत्री हुए - कल्याण सिंह , नरेंद्र सिंह , प्रदीप सिंह, एवम जगदीश कंवर । 
नरेंद्र सिंह की बाल्यकाल में ही 5 वर्ष की आयु में देहांत हो गया था । इनका चबूतरा (थान ) बना हुआ है ।

कल्याण सिंह के पुत्री पुत्र क्रमशः अदिति एवम आदित्य सिंह सोढा है । प्रदीप सिंह के पुत्र जयवंश सिंह है 
जगदीश कंवर सा का ब्याह पाली जिले के ठाकुरला गांव के अजीत सिंह जी कुम्पावत के साथ हुआ । जगदीश कंवर सा की पुत्रियां हर्षिता एवम नीतिशा बाईसा है ।

खारिया सोढा का सोढा परिवार,  वीरमदे सोढा का वंश है । 

यह जानकारी एवम सन्दर्भ अलग अलग पुस्तको के अध्ययन, बुजुर्गों की वार्ता , इतिहासकारों के वीडीयो , आदि कई जगह से प्राप्त हुई । इसमें मुख्य योगदान -  
- नैणसी मुणोत की ख्यात 
- नैणसी मुणोत रा परगना
- क्षत्रिय इतिहास ब्लॉग के रचनाकार यदुवंसी सुरेंद्र सिंह जी 
- इतिहासकार नेतसिंघ जी सोढा हाल निवासी मुंबई
- वेबदुनिया पोर्टल
- एवम कमल सिंह जी सोढा पुत्र श्री फतेह सिंह जी सोढ़ा द्वारा उपलब्ध कराये गए प्रपत्र (कुर्शीनामा खारिया सोढा), हाल निवासी सोजत सिटी 
का रहा है । 
III आपके सहयोग के लिए साभार साधुवाद lll

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि राजस्थान के इतिहास का सर्वाधिक विश्वनीय स्रोत " मुहणोत नैणसी री ख्यात" है । जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के देश दीवान नैणसी द्वारा 17वि शताब्दी में लिखित मूल ख्यात राजस्थानी गद्य में लिखी गयी है । इसके अध्ययन के बिना राजस्थान का अध्ययन अधूरा होता है । इतिहासकारों ने तो यहां तक कहा है कि "कर्नल टॉड" को अगर यह इतिहास मिल गया होता तो आज राजस्थान का इतिहास और भी विस्तृत , समृद्ध , यशश्वी लिखा होता । 
नैणसी मुणोत की ख्यात के पृष्ठ संख्या 235 में स्पष्ठ उल्लेख मिलता है कि जब सहसमल की उनके भाईयो ने हत्या कर दी तो उनके पुत्र अड़वाल ( अडीकमल ) अपनी मौसी राणी लक्ष्मी के यहां मारवाड़ आये । और इन्ही के वंश में ईशरदास जी को सोजत का गांव खारिया, पट्टे में आया । नैणसी मुणोत की ख्यात के भाग 1 से यहां दो पृष्ठ छाया चित्र सहित संलंग्न है । जो इस लेख की प्रामाणिकता को सिद्ध करते है II

सोढ़ा वंश की खाँपे / शाखाएं / वंशावली बहुत विस्तृत है । जिसका वर्णन इसी ब्लॉक में कई बार हुआ है । परन्तु यह इतिहास गांव खारिया सोढ़ा के सोढा राजपूतो को केंद्र में रखकर लिखा गया है , इसलिए यहां सिर्फ उन्हीं से संबंधित वंशावली ही है ।  गोरधन जी के पुत्र के आगे की विस्तृत वंशावली गांव खारिया सोढ़ा के सोढा परिवारों में खारिया सोढा का कुर्शीनामा प्रपत्र के रूप में उपलब्ध है । इसलिए यहां सिर्फ रूगनाथ सिंह जी के ही वंशवृक्ष को लिखा गया है ।
 
अपील- 
चूंकि जगह जगह से आंकड़े एकत्रित किये गए है, आंकड़ो को मिलाने का प्रयास किया गया है और एक ही जगह पर हजारों वर्ष पूर्व का इतिहास लाने का प्रयास किया गया है । इसलिए गलतियों की पूर्ण संभावना है । 
आप सभी से निवेदन है कि उन गलतियों की तरफ हमे सूचित करे । तथ्यों के साथ त्रुटि सही पाई गई तो संशोधन अवश्य किया जाएगा ।


संकलनकर्ता
कल्याण सिंह सोढा राम सिंह सोढा
ग्राम खारिया सोढा