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Monday, February 25, 2019

सोढा और रता कोट का राज


सोढा (परमारों का इतिहास )

बाड़मेर


बाड़मेर जो राजस्थान में हे, नो कोटि मारवाड़ पति धरणीवराह के वंसज बाहड़राव ने बाहड़मेर (बाड़मेर) बसाया उनके पुत्र चाहडराव ने शिव को ,  शिव के मांन सरोवर तालाब बहूत ही रमणीय स्थान था वहा स्वर्ग से अप्सराये आती थी , राजा चाहड़ को किसी ने बताया होगा तो उत्सुकता वस वहा छुपके पहरा स्टार्ट हुआ , पूर्णिमा की रात गहराई और अप्सराये उतरी और राजा ने देखा अपनी आँखों से और ध्यान से जहा कपड़े रखे थे वो झटाक से प्राप्त कर लिए बाकि तो सब रूप बदल के उड़ गई एक अप्सरा प्रभावती के कपड़े हाथ आये और वो विनती करने लगी राजा ने शादी का प्रस्ताव रखा .
उन्होंने प्रस्ताव रखा 3 वचन लिए-
एक तो उनके लिए बाग हो और वही एक थम्भीया महल हो और आप जब भी अंदर पधरोगे आवाज देके पधरोगे 

अम्बावाड़ी में एक थ्म्भा महल बना और वो समय परमरो का स्वर्णिम काल था कोई कमी थी नही उन जगहों के अवसेस भी बयान करते हे कितनी सम्पनता थी महल तैयार होने के कई सालो बाद सुखी जीवन व्यतीत हो रहा था लेकिन राजा को एक बात हमेसा कचोटती की अंदर परवेस के पहले आवाज लगानी इसका क्या मतलब .

इस समय में उनको एक पुत्री जिनका नाम कल्याण कुंवरी (सचियाय), 2 पुत्र हुए सोढा सांखला .   राजा ने सोचा इतने सालो बीते आज बिना आवाज महल में परवेस करते हे , होगा देखा जायेगा,  अंदर परवेस करते ही देखा शेरनी और 3 बचे भी शेर के रूपमे सो रहे हे राजा वापस मुड़े आवाज रुको और वो सब अपने स्वरूप् में आ गए और आवाज आई अब मेरे जाने का समय आ गया वचन पुरे हुए उस वक़्त समय ऐसा था वचन वचन होता था आगे कोई अवलेहना नही होती थी .
पुत्रो को आसीस दी सांखला को पूर्व में जाने को कहा तेरा राज होगा और सोढा को पश्चिम में कहा वहाँ तेरा राज्य रहेगा और कल्याण कुंवरी सचियाय जो अवतार था उसे अपनी इच्छा पूछी वो उसी उम्र में सति हो स्वर्ग पधारी दोनों भाइयो को आसीस दी जहा रहो सती के देवल बनाना सदा सक्ति सहाय रहेगी और माँ प्रभावती शिव से विदा ले के स्वर्ग प्रस्थान कर गई
सांखला बड़े होने के बाद ओसिया जिसे उस वक़्त उकेशपुर कहा जाता था वहा अपना राज स्थापित किया उस वक़्त चारो और परमार राज था
सांखला ओसिया के साथ वापस भाई वंट में किराडू आया वहा आ गए ओसिया को यही किराडू से संचालित करने लगे समजदार विद्वानो ने मना भी किया लेकिन किराडू की सम्पनता से मोह भंग नी छुटा वचन अनुसार उन्हें पूर्व में आगे से आगे प्रगति करनी थी एक दो युद्धों में पराजय हुई और तबसे सांखला कई जगहों चौहानो राठोरो के सामन्त रहे ठिकाणे कई हे पर राज घराना नही कई जागीरे हे बीकानेर जोधपुर जैसलमेर में और सांखला गोत्र के कई लोग कारण वस जेन माली कुम्हार आदि जातियो में मिल गए.

वचन अनुसार सोढा पश्चिम में गए उनको वहा राज करने वाले सुमरा परमार जो उनका भाईपा था खूब स्पोर्ट मिला और     रता कोट का राज आबाद किया समय के साथ अमरकोट आबाद किया तबसे उनके वंसज धट(धाट)प्रदेश फिर पारकर उसके बाद पारकर से एक वंसज मूली गुजरात में अपना राज आबाद किया जामनगर के मुख्य सामन्त रहे .
सोढा 12 गांव हे जागीर के हिंदुस्तान पाकिस्तान अलग होने के बाद 
जेसिंधर सुन्धरा बन्धडा खुहडी बेरसियाल करड़ा पोछिना इत्यादि जागीरे इन जागीरों में 24 से 36 गांव हे ये हिंदुस्तान में रह गई 3 जागीरे जोधपुर में हे मोगड़ा भुंका और एक हे मोगड़ा के पास
चाहड़राव
सोढा
चाँचक देव जी
राय देव जी
जभरामजी (जयभर्मजि)
जसोड़ जी
सोमेस्वर जी
धारावरसजी
दुर्जन साल जी
राणो खिंवरो जी

राणा खिंवरा जी की एक शादी राणी रूप कँवर कुंवरी रॉवल दुदोजि देवराजजी के वहाँ हुई थी वहा एक बारात बीकानेर से भी आ रही थी तो राणा खिंवरा ने मन ही मन सोचा राठोरो की रियासत बड़ी हे दान वगेरह खर्च गाजे बाजे सब में हमारी तोहीन होगी उससे अच्छा किसी को बिन बताये आप घात करने का सोच माँ सचिया को याद कर रात में तलवार उठाई अपने आप पे और देवी प्रकट हुई रुक आवाज आई पूछा क्यों कुल को लजाने वाली हरकत कर् रहा हे बोल क्या तकलीफ हे सारा व्रतांत कहा सुनाया देवी ने वरदान दिया दान जितना सोना हिरे जवाहर ऊंठ घोड़े बारात जाने से लगा के आने तक जितने दे सको उतने देना कोई कम नही होगा जितने ले जाओगे उतने ले आओगे
जैसलमेर की सूरजपोल जहा तोरण वंधा वहा आज भी राणा खिंवरा के घोड़े के पोड़ के निसान हे
दान इतना किया की ढोली तुरी 1550 रयत घोड़े ऊँठ जैसलमेर में सोढा सोढा हो गया दोहा कहा गया
कीरत वाला कहाला दन्त वेरीया डोढा परनिजे सारि पृथ्वी गविजे सोढा 

राणो खिंवरो
राणो अवतार देव जी
राणो थिरोजि
राणो हमीर जी
राणो विसो जी
राणो तेजसी जी
राणो कानो जी
राणो वणवीर जी
राणो गोविन्द जी
राणो नारायण जी
राम
वेरसी
गंगदास
सुन्धरा जागीर
के प्रथम जागीरदार

Thx and Reference 
क्षत्रिय सुरेन्द्र सिंह भाटी तेजमालता जैसलमेर FB WALL


सोढ़ा परमार की खांपे


सोढा इतिहास



|<| परमार |>|

¤वंश - अग्निवंश
¤वेद - यजुर्वेद
¤गौत्र - वशिष्ठ
¤नदी - क्षिप्रा
¤इष्टदेव - महाकाल या कालभैरव
¤कुलदेवी - श्री संचावलीजी या गजानन माता धार
¤शाखा - वाजसनेयी या माध्यन्दिनी
¤सूत्र - पारस्कार ग्रह्म सूत्र
¤प्रवर - वशिष्ठ या अत्रि
¤व्रक्ष - कदम्ब या पीपल
¤शाखाएँ - पैँतीस
¤प्रमुख गददी - धारानगरी या उज्जैन
¤उपवेद - धनुर्वेद
¤कुलगुरू - वशिष्ठ या पाराशार
¤ध्वज - पीत या पीला
¤नोबत - बजरंग
¤नगारा - विजय बम्ब
¤पक्षी - मयूर
¤धूणी - हराड़ी
¤भैरव - कालभेरू
¤गढ़ - आबू
¤ढोल - बाजुवार
¤नगारची - डीरा
¤तलवार - तेंग
¤उपाधि - सवाई
¤घोड़ा - कुमेत
¤प्रणाम - जय शंकर या जय महाकालेश्वर
¤तिलक - शिव तिलक
¤बंधेज - जीमणा
¤कुंड - अग्नि कुंड
¤निशान - पीला

|<|परमारोँ की वंशावळी|>|

¤-परमार या पंवार
¤-पहुंकर
¤-परुराव या परुख
¤-कलंक कुँवर
¤-सेन
¤-परासेन
¤-भरत
¤-भांण
¤-चन्द्र
¤-किलंग इन्द्र
¤-हंस
¤-श्री हंस
¤-चतरंगदे
¤-गंध्रपसेन
¤-वीर विक्रमदे या राजा विक्रमादित्य
¤-विक्रमसत या वीकमचित्र
¤-भीमसुख
¤-बलूदेव
¤-पत
¤-भूपत
¤-राजा जयधमल
¤-वीसल
¤-श्यामभाण
¤-शकत कुँवर
¤-वीरुचंद
¤-महेपाल डंड
¤-प्रथ्वी डंड
¤-गौपिड़
¤-गौ देव या महापिंड
¤-राजा कारथेन
¤-राजा संहस
¤-सतये कुँवर
¤-वीरपाल
¤-विजयेराज
¤-श्यामजी
¤-राजा सिँघलसेन
¤-राजा भोज धार के राजा
¤-राजा बंधजी
¤-राजा उदयाजीतजी
¤-राजा जगदेव
¤-डाभरखजी
¤-धंधूमालजी*
¤-राजा धोमजी*

*clarification needed डाभरखजी से धोमजी से राजा धरमदेवजी से धांधू से धरणी वाराह से बाहड़ से
सोढा और सांखला*

¤-ओपतरावजी*
¤-अपररावजी*
¤-बाहड़रावजी*
¤-सोढा सांखला*
¤-चाचकदेवजी
¤-रायकदेजी
¤-जेभजी
¤-जसडजी
¤-सोमेसरजी
¤-धरावरेस
¤-दुर्जणजी
¤-खीँवजी राणा
¤-अवतारदे
¤-थिरोजी
¤-हमीरजी
¤-बीसोजी
¤-तेजसिँहजी
¤-चांपोजी
¤-गांगोजी
¤-प्रतापजी
¤-चन्द्रजी
¤-भोजराजजी
¤-जसंवतजी
¤-जगमालजी

|<|परमारोँ की खांपेँ|>|

¤-वराह
¤-लोदरवा परमार
¤-बूंटा परमार
¤-चन्ना
¤-मोरी
¤-सुमरा
¤-ऊमट
¤-बीहल
¤-डोडिया
¤-सांखला
¤-भायला
¤-भाभा
¤-हूण
¤-सांवत
¤-बारड
¤-सुजान
¤-कुन्तल
¤-उधला्‌
¤-बलिला
¤-गुंगा
¤-गहलड़ा
¤-सिँधल
¤-नांगल
¤-थिरिया
¤-जोखा
¤-नल
¤-मदन
¤-पोसवा
¤-खाहर
¤-कालमा
¤-सरबड़िया
¤-सूकला
¤-महपावत
¤-ढेकहा परमार

सोढ़ा परमार की खांपे


¤-सोढा
¤-भाण सोढा
¤-केलण सोढा
¤-नागड़ सोढा
¤-संग्रामसी सोढा
¤-वैरसी सोढा
¤-अखा सोढा
¤-नदा सोढा
¤-लूवामान सोढा
¤-सीँधल सोढा
¤-सांध सोढा
¤-भुजबल सोढा
¤-सादुल सोढा
¤-मानसिँह सोढा
¤-गंगादास सोढा
¤-राम सोढा
¤-नबा सोढा
¤-मालदे सोढा
¤-लरा सोढा
¤-देवा सोढा
¤-बरजांग सोढा
¤-उदा सोढा
¤-महराण सोढा
¤-अखैराज सोढा
¤-जैतमाल सोढा
¤-सूरा सोढा
¤-मधा सोढा
¤-धोधा सोढा
¤-तेजमालोत सोढा
¤-करनिया सोढा
¤-विजैराण सोढा
¤-नरसिँह सोढा
¤-सुरतान सोढा
¤-नगरपाल सोढा
¤-जोधा सोढा
¤-आसरवा सोढा
¤-दूदा सोढा
¤-पता सोढा
¤-रायब सोढा
¤-अर्जुनोत सोढा
¤-देपाल सोढा
¤-सतला सोढा
¤-वीरमदे सोढा
¤-भारमल सोढा
¤-टप्पा सोढा
¤-मला सोढा
¤-भेरवाणी सोढा
¤-भारसार सोढा
¤-डला/दला सोढा
¤-भोजराज सोढा
¤-कीता सोढा


परमारोँ की रियासतेँ :

^ मालवा ^
¤-नरसिँहगढ़
¤-राजगढ़
¤-धार
¤-देवास
¤-बख्तगढ़
¤-मथनार
¤-छतरपुर
¤-उमड़वाड़ी
¤-मांड़ू
¤-उज्जैन
¤-धार
¤-माहेश्वर
¤-चन्द्रभागा

^ गुजरात ^
¤-दांता
¤-सूथ
¤-मूली
¤-मले
¤-भुखास मेसरी

^ बिहार^
¤-डुमराँव
¤-सकरपुरा मुंगेर

^ पंजाब ^
¤-बाघल

^उत्तर प्रदेश^
¤-टिहरी गढ़वाल
¤-पौढ़ी गढ़वाल

^राजस्थान^
¤-आबू
¤-बीजोलिया ठिकाना
¤-लौद्रवा
¤-चन्द्रवती
¤-धौलपुर

^हरियाणा^
¤-सोनीपत
¤-रोहतक

^पाकिस्तान^
¤-अमरकोट
¤-छोर
¤-न्यू छोर
¤-हवेली
¤-सिन्ध प्रदेश

परमारोँ की अतिरिक्त शाखाएं

¤-चावड़
¤-डोड
¤-उज्जैनियां पंवार
¤-गंधवरिया
¤-मालवीय परमार
¤-ढेकहा परमार
¤-भुवाल परमार
¤-भोजपुरिया
¤-सुमरा
¤-वराह
¤-चावड़ा वंश
¤-भाले अलीगढ
¤-कहम
¤-मानको
¤-उडिया
¤-बकछाहा
¤-खेरत
¤-चारटे
¤-मेपाती
¤-बलहार
¤-रेहार
¤-सोराठिया
¤-हरेरा
¤-बरकोटा
¤-सम्पल
¤-कालपुसर
¤-होकम्मा
¤-पुसया
¤-डबगार
¤-चढ़ेले
¤-निबाह
¤-धुरा
¤-शाहपुरिया
¤-मुजेले
¤-गन्धीवार

Thx and refrence to-

महेन्द्रसिंह सोढा रतरेडी (Facebook wall)

Saturday, February 23, 2019

सोढ़ा जी के परिवार मे राणा की पदवी

अमरकोट के सोढ़ा राणा

अमरकोट सुमरा वंश की राजधानी था ! सोढ़ा जी इ.स.1125 वी.स.1181 मे अमरकोट आए ! सुमरा राजा ने सोढ़ा जी को रतोकोट गाव रहेने दिया और रतोकोट जागीर भी दी ! सोढ़ा जी और उनके वंशज रतोकोट ऐकसो वर्ष रहे !
सोढ़ा जी के दो पुत्र ऐक चामकदेव जी और सिंधल जी हुवे !
चामकदेव जी के पुत्र राजदेव जी ने अपने भाई ओ के साथ मिलकर अमरकोट पर कब्जा कीया और राजधानी स्थापित की !
🌴 सोढ़ा जी के पीछे परिवार मे चामकदेव जी की सीधी अमरकोट वंशावली 🌴
👉🏻सोढ़ा जी
👉🏻चामकदेव जी
👉🏻राजदेव जी
👉🏻जयभ्रमजी
👉🏻जेसड जी
👉🏻सोमेश्वर जी
👉🏻धारावर्ष जी
👉🏻धरजनशाल
👉🏻राणा खीहरा जी
👉🏻राणा अवतारदे
👉🏻राणा थरोजी
👉🏻राणा हमीर जी
👉🏻राणा वीसो जी
👉🏻राणा तेजसिंह
👉🏻राणा चांपा जी
👉🏻राणा गागा जी
👉🏻राणा प्रतापसिंह
👉🏻राणा चंद्रसिंह
👉🏻राणा भोजराज जी
👉🏻राणा ईश्वर दास
👉🏻राणा जोधसिंह
👉🏻राणा जयसिंह
👉🏻राणा आसकरण जी
👉🏻राणा महेराज सिंह
👉🏻राणा केशर सिंह
👉🏻राणा विजय सिंह
👉🏻राणा खीम सिंह
👉🏻राणा सबल सिंह
👉🏻राणा शिवजीत सिंह
👉🏻राणा महेराज सिंह
👉🏻राणा भभूत सिंह
👉🏻राणा पीरदान सिंह
👉🏻राणा जसवंत सिंह
👉🏻राणा सूरत सिंह
👉🏻राणा अरजण जी
👉🏻राणा चंदन सिंह
👉🏻राणा हमीर सिंह जी


अमरकोट मे सोढ़ा जी के परिवार मे राणा की पदवी खीहरा जी के लग्न समय .जेसलमेर मे .जौमा माताजी से मीलीहे !


संदर्भ एवं आभार 
सोढा राजपूत @ सोढा जागीर की फेसबुक वाल से